गुस्से पर काबू

गुस्सा इंसान के अंदर है कैसा स्ट्रांग इमोशन है की अगर यह कंट्रोल ना किया जाए तो आपके अंदर तबाही ला सकता है अगर आप भी ऐसे लोगों में परहेज उनको गुस्सा खूब आता है तो यह चैप्टर आपके लिए है

चलिए इस बात को मैं आपको एक कहानी के जरिए समझाता हूं एक बार बाप और बेटे होते हैं जो एक साथ रहते हैं बेटे को बहुत गुस्सा आता था जो किसी को भी कुछ बोल देता था बाप को बेटे से इस बर्ताव के कारण बहुत दिक्कत होती थी एक दिन उसने सोचा कि वह अपने बेटे से इस बारे में बात करेगा वह अपने बेटे को बुलाता है और बोलता है कि मैं तुम्हारे बर्ताव से बहुत परेशान हूं वह अपने बेटे से कहता है मैं चाहता हूं कि तुम मेरी बात मानो और अपने बेटे को कीड़ों से भरा हुआ एक बॉक्स देता है और बोलता है कि जब भी तुमको गुस्सा आए तुम एक कील दीवार में ठोक देना बेटा बोलता है कि ठीक है पिताजी में ऐसा ही करूंगा अब होता यह है कि बेटे को गुस्सा आता है और वह एक ही दिन में 20 से कील ठोक देता है। ऐसा लगातार कई दिनों तक होता है एक दिन ऐसा आता है कि बेटे को लगता है कि वह कुछ तो गलत कर रहा है और वह अपने गुस्से पर काबू करेगा आने वाले दिनों में दीवार पर किलो की संख्या कम हो जाती है जो पहले दिन की 20 हुआ करती थी वह अब 7:00 या 8:00 हो गई धीरे-धीरे यह संख्या कम होती गई और एक दिन ऐसा आया जिस दिन दीवार पर एक भी कील नहीं ठोंकी गई जब बेटे को इसे समझ आ गया कि उसका गुस्सा काफी हद तक शांत हो गया तो उसने अपने पिताजी को धन्यवाद दिया अब पिताजी बेटे से दूसरी विनती करते हैं की बेटा जब भी तुमको गुस्सा आए तो तुम एक कील दीवार से निकालना तो उस बॉक्स में वापस डाल देना बेटे ने वही किया 1 दिन आया जब दीवार पर कोई कि नहीं बची बेटे ने अपने पिता जी को बहुत धन्यवाद दिया और सोचा कि वह बेटे की तारीफ करेंगे पिताजी अपने बेटे से कहा कि बेटा मैं आज बहुत खुश हूं और कहा कि बेटा मैं तुम्हें बहुत कुछ देना चाहता हूं वह बेटे को दीवार के पास ले गया दीवार की तरफ इशारा किया कि देखो इसमें कितने छोटे-छोटे छेद हो गए पिताजी ने कहा कि तुम्हारी जिंदगी भी इसी की तरह है जब भी तुम्हें गुस्सा किया है किसी ना किसी जिंदगी में ऐसे ही छेद किए हैं और जिसके ऊपर तुमने जितना गुस्सा किया है उसकी लाइफ उतनी ही खराब हुई है जैसे आपने एक ही बार से निकाल ली लेकिन 6 गए वैसे ही अगर किसी से माफी भी मांगी है तो उसके दिल में कड़वाहट तो होगी ही।हम अपनी असल जिंदगी में ऐसे ही हालातों का सामना करते रहते हैं हम इरिटेट होकर गुस्सा करते हैं और सामने वाले को कुछ भी ऐसा बोल जाते हैं कि जो हमें नहीं बोलना होता है फिर भी चाहे वह हमारे पैरंट से फ्रेंड से या कोई और अगर किसी ने भी हमारे साथ पोस्ट और पास्ट में बुरा किया है आज वह अच्छा हो गया और फिर भी हमें उसकी पुरानी आदतें याद रहती है हमेशा यही होता है कि हमको सामने की अच्छाई नहीं दिखती है तो आप भी सोचो कि अगर आप किसी के साथ ऐसा करेंगे तो ऐसा कैसे लगेगा आपकी कड़वा कड़वी बातें उस इंसान के साथ हमेशा रहेंगे तो जब भी आपको गुस्सा आता है तो एक कील और दीवार पर बोल देना कहानी याद रख लेना । Thank you guys love you to all by (Ali Hasan)

Published by Alipharma

I am pharmacist and I have created blog and help who person who are looking in pharmacy ,health and personality development things like book notes and news and so on .

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